भौकाली बाबा

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कभी-कभी ये मासूम दिल सोचता है कि यदि ये बाबा नहीं होते तो क्या भक्ति नहीं होती? कभी-कभी ये मासूम दिल सोचता है कि यदि ये बाबा नहीं होते तो क्या जीवन से परेशानी दूर नहीं होती? कभी-कभी ये मासूम दिल सोचता है कि यदि ये बाबा नहीं होते तो क्या कोई हमारा दर्द-ए-दिल नहीं समझता? कभी-कभी ये मासूम दिल सोचता है कि यदि ये बाबा नहीं होते तो क्या ईश्वर हम पर कृपा नहीं करते? और कभी-कभी ये मासूम दिल सोचता है कि यदि ये बाबा नहीं होते तो फिर क्या हम इतना सोच रहे होते? अरे भाई सब बातें छोड़ो यदि ये बाबा नहीं होते तो क्या मैं ये लेख लिख रहा होता।

Baba

कभी ‘आसाराम’,कभी ‘नित्यानंद स्वामी’,कभी ‘स्वामी सदाचारी’,कभी ‘इच्छाधारी संत स्वामी भिमानंद जी महाराज’ तो कभी ‘गुरमीत राम रहीम सिंह’ और आजकल के एकदम लेटेस्ट “संत रामपाल”,वैसे कतार बहुत लंबी है लेकिन ऐसे बाबा लोगों के नाम ही गिनता रहा तो शायद बस नाम ही लिखता रह जाऊंगा। बात इतनी सी है कि जितने बड़े,धार्मिक और स्वादानुसार मीठे नाम हैं उतने ही छोटे,निर्दयी और स्वाद से कड़वे इन महानुभवों के कर्म हैं। बेख़ौफ़ से बेबस होने तक का सफ़र बहुत लंबा है, कहानी अभी शुरू हुई है ज़रा दिल थाम लीजिए। Maths में Probability होती है और वो मैं यहाँ follow करता हूँ क्योंकि आप उनके समर्थक भी हो सकते हैं या शायद नहीं।

किसी बाबा को सपने में हनुमान जी ने आकर प्रशाद दिया तो किसी बाबा ने सुबह उठते ही कबीर का रूप ले लिया। किसी को कृष्ण से मोह हो गया तो वो राधा बन गई तो किसी को सपने में दीक्षा मिल गई तो वो अगली सुबह से लोगों में कृपा बाटने लग गए। एक,दो,तीन से शुरुआत करते-करते लाखों समर्थक हो गए, बड़े-बड़े आश्रम हो गए, अंडरग्राउंड धंधे हो गए, बैंक अकाउंट swiss bank में हो गए और कृपा करने के उपाय चाचा चौधरी जैसी कॉमिक्स से मिल गए। इस बिज़नस का सीधा फंडा है कि बस अपना कान सीधे तरीके से पकड़ो और दूसरे का सर के पीछे से हाथ घुमाकर, बंदा भी खुश और कहेगा कि “भाई कुछ तो बात है, बाबा ने उपाय औरों से अलग बताये हैं तो अच्छे ही होंगे।” बुरा ना मानें तो एक बात गले में अटक रही है कि खिलाड़ी तो इनके समर्थक भी हैं जो जी-जान से इन्ही का पल्लू ओढ़े(शायद आँखों से दिखता हो लेकिन दिमाग से तो अंधे ही हैं) खुद के मोक्ष-प्राप्ति के सपने देखते हैं और भूल जाते हैं कि जब उपर पहुचेंगे तो जवाब उन्ही को देना होगा,उनके महाराजा,बाबा,संत या स्वामी को नहीं. एक बात पक्की है बहकावे में आओगे तो पछताओगे और नहीं आओगे तो चार लोगों को और बचाओगे। संकल्प आपका है, फायदा समाज का, और आजकल तो हर बात “जनहित में जारी” कहकर खूब वाह-वाही लूटती है।

मैं नहीं जानता कि ऐसा क्या जादू होता है कि बाबा पिचकारी मारें तो समर्थक खुश होते हैं, रंग डाले तो प्यार समझते हैं, गाना गायें तो झूमते हैं और यदि यही बगल पड़ोस का दादा अपनी पड़ोसन की बेटी के साथ कर दे तो शोर शहर में तो नहीं,लेकिन पूरे महौल्ले में तो ज़रूर मच जाएगा। वैसे हनी सिंह का गाना “blue eyes hypnotize kardi mainu” भी जगजाहिर करता है, कहीं ये किसी समर्थक का किसी बाबा को गिफ्ट तो नहीं है क्योंकि काफी समर्थक तो सम्मोहित भी हो जाते हैं, अब ये कहना मुश्किल है कि इसके लिए eyes ब्लू होना भी ज़रूरी है क्या? अब और गहराई में जाओ तो पता चलता है कि कोई महानुभव कह गए थे कि यदि गुरू गलती करे तो चेला गलत नहीं होता क्योंकि चेले ने तो गुरू को आदर्श माना था लेकिन बात अधूरी सी लगती है जैसे सनी लियॉन बॉलीवुड में आने के बाद। भाई अगर दिख रहा है कि गुरू सात-सात बीवियाँ लेके बैठे हैं, मर्डर से लेकर रेप तक के केस चल रहे हैं, धन-दौलत बेशुमार है, बैंक अकाउंट में पैसे जमा कराकर कृपा भेजते हो, पंडाल में घुसने और पास जाकर देखने के भी पैसे लगते हो तो चाहे आप pythagorous theorem लगालो या धरती को त्रिकोण बना दो, गुरू को झोलाछाप का श्रेय देकर और चार चप्पल से पूजा करके ही आश्रम से बाहर आओगे। लेकिन कहते हैं कि २१वीं सदी है, जमाना बदल गया, जो दिखता है वो होता नहीं, जो होता है वो बिकता नहीं , धर्म के नाम पर अधर्म कूट-कूट कर चल रहा है इसलिए समर्थक भी सब कुछ जानने के बाद भी बाबा के नाम की माला एक हाथ में,एक गले में,एक घर के मंदिर में,एक दुकान के गल्ले में और एक वॉलेट में रखते हैं, शायद शुभ धन-वर्षा हो जाये, शायद सुख-शांति आ जाये और कुछ नहीं तो स्वर्ग में अपनी एक सीट तो बुक हो ही चुकी है।

खैर चक्कलस है, जो है सो है, कब तक अच्छा सोचोगे, अगर किसी का बुरा नहीं सोचा, किसी से इर्ष्या नहीं हुई, किसी के दुःख में मेकअप नहीं किया, तो ये कलयुग भी तो नहीं रहेगा, फिर इन संतों को कौन पूछेगा और दूसरे की रोटी कैसे छीनेगी। इन ढोंगी बाबाओं ने तो चिताओं पर रोटी सेकने का शौक पाल लिया है, ये भूल गए हैं कि जहन्नुम में पकोड़े की तरह ही तले जाएंगे लेकिन आप कब तक इन झोलाछाप संतों को अपनी मेहनत की कमाई पूजते रहेंगे? वैसे तो आजकल teleshopping भी बहुत डिमांड में है, श्री हनुमान चालीसा यंत्र मात्र 4000 रूपये में मिल जाता है और साथ में गोल्ड प्लेटेड pendant फ्री और बहुत सारे लाभ, दावा तो ये भी है कि तीज़ोरी नोटों से भर जाएगी लेकिन ये बताना भूल गए कि आपकी नहीं,उनकी। चॉइस आपकी है, अक्ल आपकी है, वक़्त आपका है, सही निर्णय से आपका भला और गलत से ढोंगियों का भला। “भला” होना पक्का है लेकिन बस probability है, वो ही maths वाली। यकीनन अब तक 40 में से 20 तो मेरे खिलाफ हो चुके होंगे और दस दुविधा में होंगे कि गाली पहले किसको दें, उम्मीद करता हूँ कि आप बचे दस में होंगे, बाकी तो सब probability है, हो भी सकते हैं और नहीं भी। और बस कभी-कभी यही सब मासूम दिल सोचता है..मासूम दिल सोचता है..मासूम दिल? अपना ध्यान रखें, होने को तो रियलिटी शो की ज़िम्मेदारी टीवी चैनल भी नहीं लेता, लेकिन सलमान से शो होस्ट करवाके नोट तो छाप ही लेता है। समझ गए तो तीस मार खां और नहीं तो हिम्मतवाला। अलविदा!

शुभ-चिंतक
आयुष गर्ग

*The opinions expressed here are the views of the writer and do not necessarily reflect the views and opinions of The Naked Truth Magazine.

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Ayush Garg

Content Developer. Strategist. (A true) Startup Enthusiast. A kind of a guy who relies on analysis, and writes to spoil the masks. A threat to humor, if one liners could kill. Twitter: @profylayush.

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